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ओरछा किले का इतिहास | Orchha Fort History

ETEditorial TeamDecember 20, 20171 min read
Updated: January 26, 2019

Orchha Fort

ओरछा किला जो भारत के मध्य प्रदेश में है। इस किले को 16 वे शताब्दी के ओरछा राज्य के राजा रूद्र प्रताप सिंह ने बनवाया था और अन्य लोगों ने इसके लिए उनकी सहायता की।

Orchha Fort

ओरछा किले का इतिहास – Orchha Fort History

16 वे शताब्दी में रूद्र प्रताप सिंह (1501-1531) ने ओरछा राज्य में यह किला बनवाया गया। वो एक बुन्देल राजपूत थे। ओरछा किले परिसर में ओरछा राज्य के अलग अलग महाराजाओं ने अपने अपने समय में अलग अलग महल और मंदिर बनवाये है।

इनमे से जो राजा मंदिर या राजा महल है इसे मधुकर शाह ने बनवाया था जिनका कार्यकल 1554 से 1591 तक था। वीर सिंह (1605-1627) के समय जहागीर महल और सावन भादो महल बनाए गए।

काली मिर्च के बर्तन और गुन्बंदो की विशेषताए जिसने लुतेंस को वास्तुकला की संरचनाओ में प्रेरित किया था वो नयी दिल्ली में बनवाई गयी।

ओरछा किले की वास्तुकला – Orchha Fort Architecture

किला के परिसर में जाने के लिए एक बड़ा प्रवेश द्वार है जिसकी शुरुवात धनुष सेतु से होती है। इसके बाद में एक बाद खुला चतुर्भुज यार्ड आता है जो महलों से घेरा हुआ है। इनमे राजा महल या राजा मंदिर, जहागीर महल, सावन भादो महल, शीश महल, उद्यान, मंडप, और मंदिर है।

ओरछा किले के परिसर में उल्लेखनीय वास्तुशिल्प सुविधाए खुले फ्लैट क्षेत्र बाल्कनिज, और सजाई हुई लैटिस खिडकियों का अनुमान लगाया गया है।

राजा महल: राजा महल जो 16वे शताब्दी में बनाया गया जहा पर 1783 तक राजा और रानी रहते थे और उसके बाद त्याग कर दिया।

इसका बाहरी भाग सरल है कीसी अलंकर के बिना लेकिन इसका अंदरूनी भाग स्तापत्य की डिजाईन में शाही रूप में है, सामाजिक और धार्मिक भगवान,पौराणिक प्राणी और लोगों के भित्ति चित्रों के साथ दिखाई देता है।

महल के उपरी भाग दीवारों में दर्पण के निशान नजर आते है। इसकी खिडकिया, आर्केड के मार्ग और अभिन्यास के योजना इस तरह बनाए जाते थे की सूर्यकिरण और धुप से पुरे दिन में अलग रूप और तापमान बनाए रखे। अंदरूनी दीवारों पर भगवान विष्णु के भित्ति चित्र थे। महल में बहुत से गुप्त मार्ग भी थे।

उद्यान: किले के परिसर में शानदार उद्यान है जिसमे एक फव्वारे की पंक्ति है जो “महल मंडप” में ख़तम हो जाती है जिसमे आठ स्तंभ है। इस शीतल प्रणाली में एक जल वेंटिलेशन प्रणाली होती है जो की “चन्दन कटोरा” के साथ भूमिगत महल से जुड़ा है।

जहागीर महल: जहागीर महल को सन 1605 में विशेष रूप से बीर सिंह देव ने बनवाया था क्यु की मुग़ल सम्राट अतिथि के रूप वहा पर केवल एक रात्री के लिए आने वाले थे और उन्हें आनंदित करने के लिए। महल चार स्थम्भो में बनाया गया है और इसमें मुस्लिम और राजपूत वास्तुकला की शानदार सुविधाए है।

इस महल के उपरी मंजिल तक पहुचने के लिए एक सीढिया की सुविधा है। यहाँ से ओरछा किले के परिसर के मंदिरे और बेटवा नदी अच्छे से दिखती है। इस महल एक पुरातात्विक सग्रहालय भी है।

इस महल का प्रवेशद्वार जो पहले मुख्य द्वार था अलंकृत है। यहाँ से शाही स्नान गृह का रास्ता जाता है और बाद में उद्यान के मध्य में जो की मुग़ल वास्तुकला में है उसमे छोटेसे रहने के स्थान है।

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