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जम्मू कश्मीर को क्यों मिला विशेष राज्य का अधिकार | Article 370

DBDeepak BaghelSeptember 21, 20181 min read

Article 370

भारत के मौजूदा समय में कुल 29 राज्य है, वैसे तो सभी राज्य भारतीय संविधान और कानून प्रणाली के अनुसार चलते हैं लेकिन कई ऐसे कानून है जो जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होते हैं। क्योंकि जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। और इसी के कारण जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा होकर भी भारत का हिस्सा नहीं बन पा रहा है। दरअसल जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा धारा 370 – Article 370 के अंतर्गत दिया गया है।

जिसे लेकर राजनीति में आए दिन कुछ ना कुछ विवाद देखने को मिलता रहता है। हाल ही में मोहन भगवत ने भी 370 आर्टिकल का जिक्र किया। आज के समय में जम्मू कश्मीर की हालत बहुत ज्यादा खराब है यहां के बच्चे आतंकवाद के साये में पलते हैं। कश्मीर के कई नौजवानों को जबरन या फिर उनका माइंड वॉश करके आंतक के दलदल में भेजा जाता है।

ऐसा इसलिए भी हो पाता है क्योंकि यहां पर भारतीय कानून की पकड़ कमजोर है केंद्र सरकार यहां पर सीधे तौर पर एक्शन नहीं ले सकती है। लेकिन जम्मू कश्मीर को – Dhara 370 – धारा 370 के तहत विशेष राज्य का अधिकार क्यों दिया जाता है। यह इस लेख के जरिये हम जानेंगे।

Article 370
Article 370

जम्मू कश्मीर को क्यों मिला विशेष राज्य का अधिकार – Article 370

दरअसल आजादी के समय भारत में 562 रियासतें थी जो सभी रियासते भारत में विलय हो गई। लेकिन कश्मीर को लेकर शुरु से विवाद था पर कश्मीर पर पाकिस्तान की नजर को देखते हुए जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह ने भारत सरकार को कश्मीर को भारत संघ में विलय करने का प्रस्ताव दिया।

लेकिन जब कश्मीर को भारतीय संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरु हुई तो पाकिस्तान के समर्थन वाले विरोधियों ने कश्मीर पर आक्रमण करना शुरु कर दिया। हालांकि जम्मू कश्मीर का भारत में विलय तो हो गया लेकिन स्थिति को देखते हुए जम्मू कश्मीर को धारा 306 के तहत विशेष अधिकार दिए गए। बाद में धारा 306 को बदल कर 370 कर दिया गया।

क्या है धारा 370 – What is Article 370

धारा 370 जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का अधिकार देता है जिसके अंतगर्त जम्मू कश्मीर को कई खास अधिकार प्राप्त है। चलिए आपको बताते है वो कौन से अधिकार है।

जम्मू कश्मीर विशेष राज्य होने के कारण यहां पर धारा 356 लागू नहीं हो सकती है यानी कि राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। जम्मू कश्मीर में शहरी भूमि कानून भी लागू नहीं होता है। साथ ही यहां पर राज्य का कोई भी बाहरी जमीन नहीं खरीद सकता है सविंधान की धारा 360 यानी की वित्तीय अपातकाल स्थिति भी यहां पर लागू नहीं होती है यानी कि पूरे देश में वित्तीय अपातकाल लगने पर भी यहां वित्तीय अपातकाल नहीं लग सकता है।

जम्मू कश्मीर में कोई भी नियम कानून या योजना लागू करने के लिए यहां कि विधानसभा की मंजूरी होना जरुरी है। जम्मू कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है जबकि भारत के बाकी राज्य में विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है। साथ ही समय से पहले सरकार गिर जाने पर यहां राज्यपाल शासन लगता है जबकि बाकी राज्यों राष्ट्रपति शासन लगता है।

जम्मू कश्मीर का अपना अलग ध्वज है साथ ही यहां पर देश के विरोध कुछ भी कहना राष्ट्रद्रोह या कानून जुर्म नहीं है। जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के लोगों को भी नागरिकता मिल जाती है। यहां कि महिलाएं अगर भारत के किसी ओर राज्य के लड़के से विवाह करती है तो उनकी नागरिकता खत्म हो जाती है हालांकि अगर वो किसी पाकिस्तानी से विवाह करती है तो ये नागरिकता बरकार रहती है। जम्मू कश्मीर में महिलाओं को आरक्षण भी नहीं दिया जाता है यही कारण यहां कि महिलाएं आज भी आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रही है।

370 के कारण ही जम्मू कश्मीर में आरटीआई लागू नहीं की जा सकती, साथ ही यहां सीएजी भी नहीं है।

अगर दूसरे शब्दों में कहे तो धारा 370 जिसके कारण एक समय में जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का अधिकार दिया गया था आज वहीं उसके विकास न कर पाने और आतंकवाद की बढ़ी वजह बना हुआ। इसे खत्म करने के लिए सरकार प्रयास भी कर रही है लेकिन जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता केवल अपने फायदे के लिए धारा 370 को खत्म नहीं होने दे रहे हैं। जिस कारण यहां के युवा भी देश के दूसरे राज्यों के युवाओं से विकास की स्थिति में 20 साल पीछे हैं।

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